सहर ने ही किए हैं धोखे सदा
इसे ही हमको भूलना होगा ।
इसी की आस ने सपने कुचले,
सहर की राह मत देखो
सहर मिले न मिले ।
वाह ... क्या बात है. बहुत गहरे दार्शनिक तत्व की और सहज शब्दों में ही संकेत किया है.बधाई. सादरआनंदकृष्ण, जबलपुरमोबाइल : 09425800818
kuchh nayi rachnaye prakshit kariye
रचना बहुत अच्छी लगी।आप मेरे ब्लाग पर आएं,आप को यकीनन अच्छा लगेगा।
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3 टिप्पणियां:
वाह ... क्या बात है. बहुत गहरे दार्शनिक तत्व की और सहज शब्दों में ही संकेत किया है.बधाई.
सादर
आनंदकृष्ण, जबलपुर
मोबाइल : 09425800818
kuchh nayi rachnaye prakshit kariye
रचना बहुत अच्छी लगी।आप मेरे ब्लाग
पर आएं,आप को यकीनन अच्छा लगेगा।
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